Shares कैसे चुने? 10 Steps to select Stocks

हम में से अधिकांश निवेशक शेयर मार्केट से बड़ी कमाई करके जल्दी अमीर बनने के सपने संजोते हैं। परन्तु शेयर मार्केट से पैसा कमाने के बजाय अधिकतर लोग अपना पैसा गवां देते हैं। एक बात याद रखिये दोस्तों, जहाँ पर भी बात पैसा कमाने की आती हैं उसका कोई शॉर्टकट नहीं हैं उसके लिए आपको मेहनत करनी होती हैं। शेयर बाजार से भी पैसा बनाने के लिए आपको मेहनत करनी होगी।

भारतीय स्टॉक मार्केट में अधिकांश शेयर्स Stock Tips के आधार पर ही ख़रीदे जाते हैं। मात्र किसी से टिप लेकर शेयर खरीद लेना आपको नुकसान दे सकता हैं। अगर बस टिप्स के आधार शेयर खरीदे और बेचे जाने लगे तो, स्टॉक मार्केट से सभी व्यक्ति अमीर बन जाये। इसलिए आपको Share select करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।

शेयर मार्केट में स्टॉक्स सामान्यतः दो उद्देश्यों  ख़रीदे जाते हैं –

  1.  ट्रेडिंग (नियमित रूप से स्टॉक ख़रीदना और बेचना)
  2.  इन्वेस्टिंग (लम्बे समय के लिए शेयर्स में निवेश करना)

आज मैं आपको इन्वेस्टिंग के लिए कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पॉइंट्स बताऊंगा जिसकी सहायता से आप अपने निवेश के लिए Best Share चुन सकेंगे। इस आर्टिकल से आप समझेंगे की अपने लिए बेस्ट Share कैसे चुने या Stock Picking Tips in Hindi.

How to Select Stock for Investing

1. सही सेक्टर की पहचान करें

शेयर बाजार में हजारों कम्पनिया लिस्टेड हैं। उनमे से आपके लिए बेस्ट स्टॉक्स चुनना काफी मुश्किल हो सकता हैं। सबसे पहले आप उस सेक्टर की पहचान करे जिसमें आपको ग्रोथ की संभावनाएं नजर आ रही हैं। सेक्टर जैसे के बैंकिंग सेक्टर, फार्मा सेक्टर, FMCG सेक्टर आदि।

बदलते ज़माने के साथ पुराने प्रोडक्ट लाने वाली कंपनियों को नजरअंदाज करे। जैसे की टाइपराइटर, डीवीडी प्लेयर बनाने वाली कंपनी का कोई भविष्य नहीं हैं। हमेशा ऐसे ही सेक्टर या कंपनी का चुनाव करे जिसका भविष्य में व्यापार बढ़ने की संभावनाएं हो। इसके लिए आपको कंपनी के बिज़नेस को समझने की जरुरत हैं। आप उस कंपनी द्वारा बनाये जाने वाले प्रोडक्ट्स के बारे में सोचिये क्या लोग उन्हें आने वाले 15 से 20 साल बाद भी प्रयोग करेंगे।

2. कंपनी के बिज़नेस को समझे

कई निवेशक बिना सोचे समझे Stock Tips के आधार पर किसी भी कंपनी के शेयर खरीद लेते हैं। उन्हें यह तक भी पता नहीं होता कि कंपनी वास्तव में क्या बिजनेस करती है। किसी कंपनी के शेयर खरीदना यानि की आप उस बिज़नेस में अपना पैसा लगा रहे हैं। इसलिए आपको पता होना चाहिए की कंपनी आपके पैसे का आखिर क्या कर रही हैं। अगर आप कंपनी के बिजनेस को सही ढंग से नहीं समझेंगे तो आपको कंपनी के द्वारा किए जाने वाले कार्य व उत्पाद परिवर्तन समझ नहीं आएंगे। इसकी वजह से आप व्यापार के वर्तमान व भविष्य के हालात का अनुमान लगाने में मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

इसलिए हमेशा इन बातों का जरूर ध्यान रखे –

  • कंपनी क्या बिज़नेस कर रही हैं?
  • बाजार में कंपनी के कौन-कौन से उत्पाद (products) उपलब्ध हैं या कंपनी किस प्रकार की सेवाएं दे रही हैं?
  • कंपनी के टारगेट उपभोक्ता कौन हैं?

3. फाइनेंसियल डाटा देखें

आपको जो भी शेयर भविष्य के आधार पर अच्छा लग रहा हो, उस स्टॉक के पिछले 3 से 5 वर्ष के फाइनेंसियल डाटा (Financial Data) को जरूर देखे। इसमें आपको बैलेंस शीट, इनकम स्टेटमेंट, कैश फ्लो और फाइनेंसियल रेश्यो देखने चाहिए।

बैलेंस शीट
  • कंपनी रिज़र्व एंड सरप्लस (Reserve & Surplus) देखें, इसमें आप देखे की कहीं कंपनी रिज़र्व एंड सरप्लस में पिछले कुछ वर्षो से कमी तो नहीं आ रही। कंपनी के रिज़र्व एंड सरप्लस बढ़ना कम्पनी के हित में होता हैं।
  • कंपनी के दायित्व (Liabilities) का ट्रेंड देखे। Liabilities अगर कम होगी तो उसे सही माना जाता हैं।
  • कंपनी की फिक्स्ड एसेट और करंट एसेट (Fixed Asset & Current Assets) का मूल्य जांचे। पिछले 3-5 वर्षो में देखे कहीं इनके मूल्य में गिरावट तो नहीं आ रही हैं।
इनकम स्टेटमेंट या P & L Account
  • इसमें आप पिछले 3-5 वर्ष के सेल्स डाटा (sales) को देखे। Sales में अगर वृद्धि हो रही हैं तो इसका मतलब हैं की कंपनी के प्रोडक्ट्स में लोगो की रूचि हैं।
  • कंपनी के Net Profit को देखे। Net Profit में पिछले कुछ सालों का विवरण देखे। अगर लाभ वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा हैं तो ये कंपनी के शेयर के लिए बहुत ही बढ़िया हैं।
Cash Flow
  • किसी भी कंपनी में 3 प्रकार की गतिविधियों से cash flow होता होता हैं। 1. Operating 2. Investing 3. Financing.
  • कंपनी के सुचारु रूप से संचालन के लिए Positive Cash Flow होना जरुरी हैं। इसलिए पिछले कुछ समय के Cash Flow के आंकड़े जरूर चेक करे।
  • कंपनी में कुछ Free Cash Flow की मात्रा भी होनी चाहिए। Free Cash Flow कंपनी के Cash Outflow के बाद बचने वाला मुक्त कैश होता हैं। यह जितना अधिक होगा व्यापार के लिए उतना फायदेमंद होगा।

ये भी पढ़े – IPO क्या हैं? IPO Process और इन्वेस्ट कैसे करे

4. EPS – Earning Per Share

EPS का मतलब होता है कि कंपनी के नेट प्रॉफिट में से कंपनी के प्रत्येक शेयर (stock) को कितना हिस्सा मिलेगा। EPS का सीधा संबंध कंपनी के प्रॉफिट से है। अगर EPS अच्छा है तो इसका मतलब है कि कंपनी अच्छा मुनाफा कमा रही है। आप EPS को वार्षिक या मासिक आधार पर जरूर देखे।

EPS को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं –

Example - 1
मान लीजिये एक कंपनी हैं X Ltd. इस कंपनी के पास 100 शेयर्स हैं, उसमे से 1 शेयर आपके पास हैं। यदि वह कंपनी साल भर के ₹1000 कमाती हैं तो उस कंपनी का EPS  यानि की Earning Per Share होगा = ₹1000÷100 share = ₹10 per share

नेगेटिव EPS वाले स्टॉक्स में आप ना ही निवेश करे तो अच्छा होगा।

5. P/E Ratio – Price Earning Ratio

P/E यानि Price to Earning Ratio. इस रेश्यो को कंपनी के 1 शेयर की मार्केट प्राइस (market price) में EPS का भाग देकर निकाला जाता है।

 P/E Ratio = Market Price Per Share / EPS 

ऊपर दिए गए Example 1 में X Ltd. कंपनी का EPS ₹10 प्रति शेयर हैं। अगर इस कंपनी की करंट मार्केट प्राइस ₹200 हो तो कंपनी का P/E Ratio होगा।

P/E Ratio = ₹200 / ₹10 = 20

इस P/E Ratio – 20 का मतलब हुआ की आपको एक वर्ष में ₹10 कमाने के लिए 20 गुना पैसे देने होंगे। अतः आपको एक शेयर के लिए ₹200 देने होंगे।

यहाँ आपको कंपनी का P/E Ratio 20 दिखाई दे रहा हैं। इसे आप कैसे तय करेंगे की यह शेयर सस्ता हैं या महंगा? इसके लिए आपको सम्बंधित कंपनी की इंडस्ट्री या सेक्टर का P/E देखना होगा। मान लेते हैं की X Ltd. ऑटो सेक्टर की कंपनी हैं और ऑटो सेक्टर का वर्तमान में 30 का P/E चल रहा हैं। इसका मतलब हुआ की X Ltd. का शेयर आपको इंडस्ट्री के P/E को देखते हुए सस्ता मिल रहा हैं।

अधिकांश नए निवेशकों द्वारा आमतौर पर कम P/E Ratio वाले शेयर को अंडरवैल्यूड और ज्यादा P/E Ratio वाले शेयर को ओवरवैल्यूड समझा जाता है। यह बात आंशिक रूप से सही भी है। परंतु प्रत्येक कम P/E Ratio वाला शेयर सस्ता हो, यह जरूरी नहीं हैं। P/E Ratio कम होने के दो मुख्य कारण हो सकते हैं। या तो शेयर undervalued हैं या कंपनी में निवेशकों का खास रुझान नहीं हैं।

अगर किसी कंपनी के Share का P/E Ratio कम हैं तो उस स्टॉक के P/E कम होने का कारण अवश्य पता कीजिये।

P/E Ratio कंपनी के वर्तमान EPS के द्वारा निकाला जाता हैं, जो हिस्टोरिकल डाटा के अलावा कुछ नहीं हैं। इसलिए अगर आप किसी कंपनी के फंडामेंटल को रिसर्च करके भविष्य की Earnings को समझने में कामयाब रहते हैं तो आप Stock Picking में महारत हासिल कर सकते हैं।

P/E Ratio की सीमाएं

दोस्तों, P/E Ratio किसी भी कंपनी के Stock select करने में एक महत्वपूर्ण रेश्यो जरूर होता हैं परन्तु ये रेश्यो सभी जगह काम नहीं आता। इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।

  • अगर कोई कंपनी नई हैं और हाल में प्रॉफिट नहीं कमा रही या कंपनी नुकसान में है तो इन कंपनियों को P/E Ratio से वैल्यू नहीं किया जा सकता हैं।
  • जिन कंपनियों की earning अस्थिर रहती हैं वहां पर भी P/E Ratio कुछ खास मायने नहीं रखता हैं।

find best shares to invest, Shares कैसे चुने

6. RoE और RoCE

यह दोनों रेश्यो किसी भी कंपनी के शेयर सेलेक्ट करते समय सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह रेश्यो आपको बताते हैं की लगाई हुई इक्विटी या कैपिटल पर कितना रिटर्न प्राप्त हो रहा हैं।

RoE – Return on Equity रेश्यो आपको बताता हैं की कंपनी अपने इक्विटी पर कितना पैसा या रिटर्न बना रहा हैं। आसान भाषा में समझे तो कम्पनी के लगाए पैसे पर कितना पैसा बन रहा हैं। मान लीजिये ABC Ltd. में ₹100 की शेयर कैपिटल हैं और ₹100 के रिज़र्व हैं। कंपनी की कुल इक्विटी हुई ₹200. माना की इस साल कंपनी का नेट प्रॉफिट रहा ₹200. तो यहाँ ABC Ltd. का ROE होगा –

[RoE = Net Profit / Total Equity]      ₹200 / ₹200 = 100%

RoCE – Return on Capital Employed रेश्यो बताता हैं की कंपनी ने अपने कुल लगाए हुए पैसो या इन्वेस्टमेंट पर कितना रिटर्न कमाया हैं। मान लीजिये ABC Ltd. में ₹100 की शेयर कैपिटल हैं और ₹100 के रिज़र्व हैं। इसके अलावा कंपनी ने ₹100 का कर्जा (debt) भी लिया हैं। यहाँ कंपनी के द्वारा लगाई हुई कैपिटल हुई ₹300. माना की इस साल कंपनी का EBIT (Earning before interest and tax) रहा ₹250. तो यहाँ ABC Ltd. का RoCE होगा –

[RoCE = EBIT / Capital Employed]      ₹250 / ₹300 = 83.33%

अगर आप किसी ऐसी कंपनी को देख रहे हैं जिसमे कोई भी ऋण नहीं हैं तब आप RoE देख सकते हैं। लेकिन किसी कंपनी ने ऋण ले रखा हैं तो उस कंपनी में RoE भ्रामक जानकारी दे सकता हैं। इसलिए जिस कंपनी में Debt हैं उस कंपनी में आप हमेशा RoCE ही देखे।  

Stocks के बारे में आप यह सब जानकरी Money Control या finology.in से प्राप्त कर सकते हैं।

7. कम्पनी के ऊपर ऋण (Debts)

शेयर मार्केट में शेयर चुनते समय कंपनी के ऊपर कितना ऋण हैं, जरूर देखना चाहिए। अगर किसी कम्पनी के ऊपर ज्यादा ऋण हैं तो उसे ऋण के ऊपर बहुत ज्यादा ब्याज (interest) भी देना होता हैं। अगर कंपनी लगातार interest का भुगतान करती रहती हैं तो उसके प्रॉफिट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं।

इसलिए आप जिस Share में इन्वेस्टमेंट कर रहे हो उस कंपनी के ऊपर कम से कम ऋण होना चाहिए। एक ऋण मुक्त (Debt Free) कंपनी को आप ज्यादा तवज्जो दे सकते हैं।

एक निवेशक के तौर पर आप कम्पनी का Debt-Equity Ratio देख सकते हैं। Debt-Equity Ratio अगर 1 से कम हो तो अच्छा माना जाता है। यह रेश्यो अगर जीरो हो तो यह एक आदर्श रेश्यो माना जाता हैं।

​8. Dividend 

जिन कंपनियों की वित्तीय हालत अच्छी होती है और लाभ कमाती हैं, वह अपने शेयर होल्डर्स को डिविडेंड का भुगतान करती है। शेयर की प्राइस में इजाफे के साथ-साथ नियमित आय के रूप में डिविडेंड को भी महत्व दिया जा सकता है। अतः पिछले 5 सालों का डिविडेंड देखें, क्या कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को नियमित रूप से डिविडेंड का भुगतान कर रही है। Dividend का ट्रेंड भी देखे, क्या समय के अनुसार कंपनी ने अपने शेयर होल्डर्स को ज्यादा डिविडेंड का भुगतान किया हैं।

फ्री में अपना डीमैट अकाउंट खोले

9. कंपनी के मैनजमेंट की जानकारी

किसी भी कंपनी का मैनेजमेंट उस कंपनी की आत्मा माना जाता है। एक अच्छा मैनेजमेंट कंपनी के भविष्य को अधिक उज्जवल बना सकता है जबकि अक्षम मैनेजमेंट अच्छी कंपनी को भी नीचे की ओर ला सकता है। इसलिए आप Share Select करते समय कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में सही जानकारी जरूर हासिल करें।

कंपनी मैनेजमेंट के बारे में आप इन पॉइंट्स का ध्यान रखें –

  • आप मैनेजमेंट पर्सन की योग्यताएं, पूर्व अनुभव और Tenure की जानकारी प्राप्त करें।
  • कंपनी की वेबसाइट से विजन, मिशन और वैल्यू स्टेटमेंट चेक करें। इससे आपको कंपनी के उद्देश्य और लॉन्ग टर्म विजन के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।
  • Share Buyback के बारे में जानकारी प्राप्त करें। अगर प्रमोटर स्वयं की कंपनी के शेयर पब्लिक से वापस खरीद रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें कंपनी के बिज़नेस मॉडल में विश्वास है और भविष्य में कंपनी के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद हैं।  ​

10. Shareholding Pattern चेक करें

किसी कंपनी का शेयर होल्डिंग पेटर्न यह दिखाता है कि कंपनी के शेयर किन-किन व्यक्तियों के पास हैं? इसमें आपको देखना है कि शेयर का कितना हिस्सा प्रमोटर्स के पास हैं। प्रमोटर्स के पास जितना अधिक Shares का हिस्सा होगा, उतना ही अच्छा माना जाता है।

अगर प्रमोटर्स के पास ज्यादा शेयर होल्डिंग होगी तो यह माना जाता है कि उन्हें कंपनी के बिज़नेस में भरोसा है। Promoters के पास कम से कम 50% Shares तो होने ही चाहिए। अगर यह ज्यादा हो तो और भी बढ़िया माना जाता है। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य हैं की Promoters Holding निजी बैंको (Pvt. Banks) पर लागू नहीं होती।

Pledge शेयर या गिरवी शेयर की स्थिति जरूर चेक करे। कहीं कंपनी के शेयर Pledge तो नहीं। अगर किसी कंपनी के शेयर Pledge पड़े हो तो आप उस कंपनी को नजरअंदाज कर सकते हैं।

निष्कर्ष

अगर आप शेयर मार्केट में सही तरीके से की गई रिसर्च और एनालिसिस के आधार पर स्टॉक चुनेंगे तो आप को नुकसान होने की संभावनाएं सबसे कम होगी। ऊपर दी गई स्टेप्स आपको एक अच्छा शेयर ख़रीदने में मदद करेंगे। हो सकता है की शुरुवात में आप को ये जानकारी जुटाने में परेशानी का सामना करना पड़े परन्तु जब आप इस काम को लगातार करेंगे तो आप को ये आसान लगने लगेगा।

ये भी पढ़े – Share Market क्या हैं? Stock Market की सम्पूर्ण जानकारी

शेयर बाजार में पैसे कमाने का गुरु मंत्र हैं की शेयर्स को हमेशा सस्ते ख़रीदे और धैर्य रखे। स्टॉक मार्केट में अधिकतर निवेशक मात्र धैर्य ना रख पाने के कारण ही स्टॉक मार्केट में पैसा गंवाते हैं।

दोस्तों, आज आपने इस आर्टिकल से सीखा की Shares कैसे चुने या How to pick stocks in Hindi. अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

डिस्क्लेमर – यह आर्टिकल मात्र इन्वेस्टर एजुकेशन और जानकारी के लिए लिखा गया हैं। कोई भी निवेश करते समय स्वयं पूरी जानकारी हांसिल करे अथवा अपने फाइनेंसियल एडवाइजर से सलाह ले।

Leave a Reply

Punji Guide