स्मॉल कैप म्यूचुअल फण्ड क्या हैं | सम्पूर्ण जानकारी

मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड अनेक प्रकार के होते हैं। इन्हीं में से एक प्रकार हैं स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फण्ड। स्मॉल कैप फंड्स को लेकर निवेशकों के मन में अनेक सवाल होते हैं जिससे वे स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश को लेकर असमंजस में रहते हैं।

आपके इन्हीं सवालों का जवाब इस आर्टिकल के माध्यम से मिल जायेगा जिसमें शामिल होगा स्मॉल कैप म्यूचुअल फण्ड क्या होते हैं, स्मॉल कैप फण्ड कैसे काम करते हैं और क्या आपको स्मॉल कैप में निवेश करना चाहिए।

स्मॉल कैप म्यूचुअल फण्ड

What is Small cap fund in Hindi

इस म्यूच्यूअल फण्ड केटेगरी को समझने से पहले मार्केट कैपिटलाइजेशन को समझना जरुरी हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर ही म्यूच्यूअल फण्ड लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप में विभाजित होते हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन स्टॉक मार्केट में ट्रेड होने वाली कंपनी की वैल्यू होती हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन को कंपनी की करंट मार्केट प्राइस को कुल आउटस्टैंडिंग शेयर्स से गुणा करके निकाला जाता हैं।

स्मॉल कैप म्यूचुअल फण्ड क्या हैं (What is Small Cap Mutual Funds in Hindi)

वे म्यूचुअल फंड जो अपना पैसा स्मॉल कैप वाली कंपनियों में लगाते हैं स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड कहलाते हैं। सेबी की नई गाइडलाइन्स के अनुसार स्मॉल कैप फंड्स को न्यूनतम 80 प्रतिशत पैसा स्मॉल कैप वाली कंपनी में ही लगाना होता है। म्यूच्यूअल फण्ड हाउस इस प्रकार के फण्ड को स्मॉल कैप केटेगरी में लांच करते हैं।

स्मॉल कैप कंपनियां वे कंपनियां होती है जिनका मार्केट केपीटलाइजेशन 500 करोड़ या इससे कम होता है। स्टॉक मार्केट में लिस्टेड टॉप 250 मार्केट कैप वाली कंपनियों के अतिरिक्त अन्य सभी कंपनियां स्मॉल कैप कैटेगरी में ही आती है।

यह कंपनियां मार्केट में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही होती है जो एक स्थायित्व को ढूंढ रही होती है। स्मॉल कैप कंपनियां अन्य कंपनियों के मुकाबले ज्यादा रिस्की होती है। परंतु इनमें अप साइड मूवमेंट की संभावना भी सबसे अधिक होती है।

स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड कैसे काम करते हैं?

स्मॉल कैप फंड निवेशकों से प्राप्त पैसों को स्मॉल कैप वाली कंपनियों में इन्वेस्ट करते हैं। ये फंड हाई रिस्क और हाई रिटर्न की थ्योरी पर काम करते हैं। स्मॉल कैप फंड का रिटर्न निवेशित स्मॉल कैप कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

मान लीजिए एबीसी स्मॉल कैप फंड है जिसकी टोटल एसेट ₹1,000 हैं। इसमें से फंड मैनेजर को न्यूनतम ₹800 स्मॉल कैप वाली कंपनियों में निवेश करना होता है और बाकी 20% अन्य कैटेगरी में निवेश कर सकता है। फंड मैनेजर, फंड के लक्ष्यों के अनुसार म्यूच्यूअल फंड का कंपोजिशन समय-समय पर बदलते रहते हैं।

Small Cap Funds में किसे निवेश करना चाइये?

स्मॉल कैप फंड का अर्थ समझने के बाद सवाल आता हैं कि किस निवेशक को स्मॉल कैप फंड में निवेश करना चाहिए? स्मॉल कैप फंड में निवेश करना है या नहीं यह प्रत्येक निवेशक के लिए अलग-अलग हो सकता है।

ऐसे निवेशक जो हाई रिटर्न्स के लिए हाई रिस्क उठाने को तैयार है वे इन फंड्स में निवेश कर सकते हैं। अगर आप ज्यादा रिस्क उठाने को तैयार नहीं है तो आप स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फण्ड से दूर रह सकते हैं।

यदि आपने पहले से दूसरी एसेट क्लास में निवेश किया हुआ है और आप अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना चाहते हैं तो आप अपनी एसेट का कुछ हिस्सा स्मॉल कैप फंड में निवेश कर सकते हैं।

मेरी राय में अगर आप की उम्र 55-60 वर्ष के आसपास है तो आपको ऐसे हाई रिस्की फंड में निवेश करने से बचना चाहिए।

स्मॉल फंड में निवेश करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैं?

(i) रिस्क – स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड कैटेगरी के अन्य फंड जैसे मिड कैप और लार्ज कैप की तुलना में काफी स्थिर रहते हैं। ज्यादा अस्थिरता (volatility) के कारण इनमें रिस्क भी ज्यादा होती है। स्मॉल कैप फण्ड बुल मार्केट में अच्छा करते हैं परंतु गिरते मार्केट में इनको अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।

इसलिए आपको स्मॉल कैप फंड में निवेश करने से पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता को जरूर देखना चाहिए।

(ii) रिटर्न – स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फंड्स में रिटर्न देने की असाधारण क्षमता होती हैं। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि स्मॉल कैप फंड ने अपने जबरदस्त रिटर्न से कई निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इस प्रकार के म्यूचुअल फंड को आप अपने पोर्टफोलियो में शामिल करके अपने रिटर्न्स को एक अलग स्तर पर ले जा सकते हैं।

(iii) एक्सपेंस रेशों – म्यूच्यूअल फण्ड में एक्सपेंस रेश्यो काफी महत्वपूर्ण होता है। स्मॉल कैप फंड का चयन करते समय एक्सपेंस रेशों को ध्यान में रखना जरूरी है।सेबी ने इक्विटी एक्सपेंस रेश्यो पर अधिकतम 2.25% की लिमिट लगा रखी है। अधिक एक्सपेंस रेश्यो आपके रिटर्न्स को कम कर सकता हैं। इसलिए आपकी स्कीम का एक्सपेंस रेश्यो जितना कम होगा आपके रिटर्न्स के लिए उतना बढ़िया रहेगा।

(iv) लॉन्ग टर्म व्यू – स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फंड खराब मार्केट परिस्थितियों में बहुत ज्यादा रिस्की होते हैं। गिरते हुए मार्केट में स्मॉल कैप फंड सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए स्मॉल कैप फंड में हमेशा लॉन्ग टर्म व्यू को ध्यान में रखते हुए ही निवेश करना चाहिए। शॉर्ट अवधि में ये बहुत अधिक वोलेटाइल हो सकते हैं।

अच्छे रिटर्न्स के लिए स्मॉल कैप फंड में न्यूनतम 6 से 10 वर्ष के लिए निवेश करना चाहिए।

(v) SIP मोड – Small cap Funds में लम सम करना रिस्की साबित हो सकता है। इस केटेगरी में लम सम करके मार्केट को टाइम करने का प्रयास करना एक गलत रणनीति भी हो सकता है। इसलिए स्मॉल कैप में SIP निवेश करने का सबसे बढ़िया तरीका माना जाता हैं। SIP के जरिये आपकी Buying cost निरंतर एवरेज होती रहती हैं।

(vi) निवेशक की उम्र – कम अवधि के निवेश में स्मॉल कैप फंड में ज्यादा अस्थिरता होती है। अगर आप की उम्र ज्यादा हैं तो आप शायद लम्बे समय तक स्मॉल कैप फण्ड में निवेशित न रह पाओ।

परंतु आपकी उम्र अभी कम है तो आप इन फंड्स में लंबे समय के लिए निवेश कर सकते हैं। लम्बे समय तक निवेशित रहने पर जोखिम की मात्रा बहुत कम हो जाती हैं।

स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फण्ड कितना रिटर्न देते हैं?

आप नीचे दिए गए कुछ लोकप्रिय स्मॉल कैप फंड्स का रिटर्न देख सकते हैं –

Return since Launch –

  • SBI Small Cap Fund – Regular Plan – 21%
  • HDFC Small Cap Fund – Regular Plan – 15.94%
  • Axis Small Cap Fund – Regular Plan – 25.45%

इस प्रकार स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फण्ड में लम्बी अवधि में काफी अच्छे रिटर्न देखे जा सकते हैं जिसकी रेंज 15 से 25% तक भी हो सकती हैं।

Risk-averse निवेशकों के लिए रणनीति

स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फंड में बेंचमार्क को बीट करके अच्छे रिटर्न देने की क्षमता होती हैं। हालांकि ये अत्यधिक जोखिम भरा निवेश होता है।  आपको इसमें तभी निवेश करना चाहिए जब आप प्राइस वोलैटिलिटी का सामना कर सकें।

लेकिन Risk averse निवेशक भी हो कर आप अपने पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा स्मॉल कैप फण्ड में लगाकर लंबी अवधि के लिए छोड़ सकते हैं। इससे आप अपने वेल्थ निर्माण के प्रयासों को गति दे सकते हैं।

स्मॉल कैप फंड में टैक्स

अन्य इक्विटी फंड्स के समान स्मॉल कैप फंड्स में STCG और LTCG टैक्स लगता है। आपको अपने रिटर्न या लाभ में से ये टैक्स देना होता है। जब आप अपनी म्यूच्यूअल फंड यूनिट्स को बेचते हो, जो प्रॉफिट आप कमाते हो वो कैपिटल गेन होता है।

अगर आप अपने इन्वेस्टमेंट को 1 वर्ष या 1 वर्ष के भीतर बेच देते हैं तो आपको 15% की दर से STCG टैक्स देना होता है। यदि आपने म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टमेंट को 1 वर्ष के बाद बेचते हो तो आपको कैपिटल गेन पर 10% की रेट से LTCG टैक्स देना होगा। एक लाख रूपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन तक आपको कोई टैक्स नहीं देना होता हैं।

अगर आप अपने स्मॉल कैप फंड का डिविडेंड प्लान ले रखा है तो डिविडेंड आपको 10% टीडीएस काटने के बाद मिलता हैं। म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर नुकसान होने की स्थिति में कोई भी टैक्स नहीं देना होता हैं।

Small cap Fund कितना रिस्की होते हैं?

स्मॉल कैप फंड छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं। अगर मार्केट में थोड़ी भी उठा-पटक होती है तो स्मॉल कैप कंपनियां ही सर्वाधिक प्रभावित होती है। इस प्रकार म्यूच्यूअल फंड की अन्य सभी केटेगरी से ये सबसे ज्यादा जोखिम भरी होती है। लेकिन साथ ही इनमें जबरदस्त ग्रोथ की संभावना भी होती है जिससे ये मल्टी-फोल्ड रिटर्न भी दे सकती हैं। लंबी अवधि के लिए निवेश करके आप इसकी जोखिम को कम कर सकते हैं।

स्मॉल कैप फण्ड के फायदे

  • हाई रिटर्न देने के कारण वेल्थ निर्माण को गति प्रदान करता हैं।
  • आपके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में विविधता (diversification) आती है।
  • कम समय में ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता।

स्मॉल कैप फंड के नुकसान

  • किसी भी उम्र वर्ग के व्यक्ति के लिए उचित नहीं।
  • बहुत ज्यादा रिस्की।
  • गिरते मार्केट में सर्वाधिक संवेदनशील।

निष्कर्ष

अगर आप पहले से अन्य म्यूच्यूअल फंड कैटेगरी में निवेश कर रहे हैं तो आप अपने पोर्टफोलियो को थोड़ा स्मॉल कैप फंड का भी एक्स्पोज़र दे सकते हैं। इससे आपका पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई होगा साथ में आप अपने रिटर्न को भी बढ़ा सकते हैं। लेकिन ये बात हमेशा ध्यान रखनी आवश्यक है कि जब भी आप स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड में निवेश करें तो एक लंबे समय के लिए ही निवेश करें। जिससे की आपकी जोखिम एक स्तर पर बनी रहेगी।

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