Mutual Fund Ratios क्या होते हैं?

एक म्यूच्यूअल फण्ड निवेशक के तौर पर हम म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करने से पहले कई पहलुओं की जाँच-पड़ताल करते हैं। जैसे की म्यूच्यूअल फण्ड की पास्ट परफॉरमेंस,  फण्ड पोर्टफोलियो, फण्ड मैनेजर आदि। परन्तु Mutual Fund Ratios की और हम ख़ास ध्यान नहीं देते हैं। एक निवेशक आमतौर पर अपनी इन्वेस्ट की गई राशि पर अधिकतम लाभ कमाने का उद्देश्य से सिर्फ रिटर्न्स के पैरामीटर्स देखता हैं।

लगभग सभी प्रकार के इन्वेस्टमेंट कुछ न कुछ रिस्क के साथ जरूर आते हैं। यदि आपके रिटर्न्स उस इन्वेस्टमेंट की रिस्क के आनुपातिक नहीं हैं तो यह निवेश आपके लिए ज्यादा फायदेमन्द नहीं होगा। एक Best Mutual Fund वहीँ होता हैं जो समान रिस्क के वाले फंड्स में सबसे ज्यादा रिटर्न दे।

दोस्तों, अब आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा की हम किसी फंड्स के रिटर्न्स को तो माप सकते हैं परन्तु किसी म्यूच्यूअल फण्ड की रिस्क का निर्धारण कैसे करे या उसे मापे कैसे।

लेकिन म्यूच्यूअल फंड्स से सम्बंधित कुछ ऐसे अनुपात या रेश्यो हैं जिसकी सहायता से आप किसी Mutual Fund पोर्टफोलियो की रिस्क या अस्थिरता को माप सकते हैं। इन रेश्यो की सहायता से न केवल आप अपने लिए एक बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम चुन सकेंगे बल्कि आप फंड्स की आपस में तुलना भी कर सकते हैं।

Alpha Ratio

Alpha Ratio in Mutual Funds –  किसी फण्ड को परखने का Alpha Ratio एक महत्वपूर्ण पैमाना होता हैं। अमूमन किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का एक बेंचमार्क इंडेक्स होता हैं। किसी फण्ड का Alpha Ratio हमें यह बताता हैं की किसी म्यूच्यूअल फण्ड ने अपने बेंचमार्क के मुकाबले कैसा प्रदर्शन किया हैं।

उदाहरण के लिए SBI Bluechip fund का बेंचमार्क S & P BSE 100 TRI हैं और इस फण्ड का अल्फा 1.50% हैं। इसका मतलब हुआ की इस फण्ड ने अपने बेंचमार्क में मुकाबले 1.50% का अधिक रिटर्न दिया हैं।

अगर यहीं अल्फा -1.50% रहता तो यह माना जाता की इस म्यूच्यूअल फण्ड ने अपने बेंचमार्क से 1.50% का कम रिटर्न दिया हैं। अगर बेंचमार्क ने ₹100 का रिटर्न दिया हैं तो फण्ड ने ₹ 98.5 का ही रिटर्न दिया हैं।

इस प्रकार अल्फा रिटर्न वह होता हैं जो म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम अपने बेंचमार्क के अतिरिक्त अर्जित करती हैं। आपने कभी किसी विशेषज्ञ या व्यक्ति से सुना होगा की इस फण्ड ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को आउट परफॉर्म किया हैं। यहाँ आउट परफॉर्म का सम्बन्ध अल्फा रेश्यो से ही होता हैं। ज्यादा अल्फा किसी भी फण्ड के लिए हमेशा अच्छा माना जाता हैं। Mutual Funds का चयन करते समय आप नेगेटिव अल्फा वाले फंड्स को अलग कर सकते हैं।

  • बेंचमार्क से अतिरिक्त रिटर्न्स को indicate करने के कारण अल्फा को फण्ड मैनेजर की वैल्यू भी माना जाता हैं।
  • अल्फा का आधार “0” (zero) माना जाता हैं। अगर अल्फा “0” होता हैं तो यह माना जाता हैं की फण्ड बिलकुल अपने बेंचमार्क के अनुरूप ही प्रदर्शन कर रहा हैं।

Alpha Ratio Formula

अल्फा रेश्यो को इस फॉर्मूले के माध्यम से ज्ञात किया जा सकता हैं।

α = RP – [RF + (RM – RF ) ß]

यहाँ-

  • α = Alpha
  • RP = Realized Return of Fund
  • RM = Market Return
  • RF = RISK – FREE Rate
  • ß = Beta

ये भी पढ़े – सही Mutual Fund कैसे चुनें – 12 बातों का जरूर ध्यान रखे

Beta Ratio

Beta Ratio in Mutual Funds – Beta का सीधा सम्बन्ध मार्केट मूवमेंट से होता हैं। यह रेश्यो किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का मार्केट की अस्थिरता (volatility) से सम्बन्ध दर्शाता हैं। Beta का बेंचमार्क हमेशा 1 माना जाता हैं। कहने का मतलब हैं की “1” आदर्श Beta ratio हैं।

मान लीजिये किसी फण्ड का Beta Ratio 1.20 हैं। इस स्थिति में फण्ड प्रत्येक ₹1 के मार्केट के उछाल या गिरावट पर ₹1.20  क्रमशः  बढ़ेगा या घटेगा। यह फण्ड अपने अपने बेंचमार्क से 20% का अधिक रिटर्न दे रहा हैं। अधिक रिटर्न देने की क्षमता होने के कारण ये फण्ड अधिक रिस्की भी होगा।

1 से अधिक बीटा वाला फण्ड अधिक volatile होने की वजह से अधिक रिस्की माना जाता हैं।

वैसे ही अगर किसी फण्ड का बीटा 0.70 हैं तो ये अपने बेंचमार्क से कम रिटर्न देने वाला फण्ड होगा। जैसे की इस फण्ड के बेंचमार्क ने ₹100 का रिटर्न दिया हैं तो यह फण्ड ₹70 का ही रिटर्न देगा। अगर बेंचमार्क ₹100 से टूटेगा तो इस फण्ड में मात्र ₹70 की ही गिरावट दिखाई देगी। इस प्रकार कम बीटा रेश्यो वाले म्यूच्यूअल फंड्स रिटर्न्स के साथ समझौता कर सकते हैं परन्तु इन फंड्स में रिस्क कम होती हैं। मार्केट की अस्थिरता का प्रभाव इन पर ज्यादा नहीं पड़ता हैं।

कम रिस्क लेने वाले निवेशक निश्चित तौर पर कम बीटा वाले म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं।

Beta Ratio Formula

Beta = Covariance / Variance

Sharpe Ratio

Sharp Ratio in Mutual Funds –शार्प रेश्यो का नाम विलियम एफ. शार्प के नाम पर रखा गया हैं। Sharpe Ratio आमतौर पर एक ही केटेगरी के दो म्यूच्यूअल फंड्स के बीच तुलना करने के काम आता हैं। किसी एक फण्ड का शार्प रेश्यो देखकर आप अंदाजा नहीं लगा सकते की वो फण्ड अच्छा हैं या बुरा।

Sharpe Ratio म्यूच्यूअल फण्ड के Risk Adjusted Return को मापने के लिए SD (Standard Deviation) का प्रयोग करता हैं। यह रेश्यो आपको बताता हैं की आपके फण्ड ने रिस्क फ्री रिटर्न के अतिरिक्त कैसा प्रदर्शन किया हैं। रिस्क फ्री रिटर्न गवर्मेंट सिक्योरिटीज और बांड्स से प्राप्त होता हैं। यह रेश्यो आपको आईडिया देता हैं की कहीं आपके ज्यादा रिटर्न ज्यादा रिस्क लेने की वजह से तो नहीं हैं। इसलिए ज्यादा Sharpe Ratio होना अच्छा माना जाता हैं।

इसका उपयोग निवेशकों द्वारा लिए गए जोखिम (risk) के मुकाबले फण्ड द्वारा दिए जा रहे रिटर्न को मापने के लिए किया जाता हैं।

मान लीजिये ABC म्यूच्यूअल फण्ड और XYZ म्यूच्यूअल फण्ड एक ही केटेगरी के अलग-अलग फंड्स हैं। इन दोनों फंड्स ने 15% का रिटर्न दिया हैं। ABC म्यूच्यूअल फण्ड का शार्प रेश्यो 1.25 हैं और  XYZ म्यूच्यूअल फण्ड का शार्प रेश्यो 1.00 हैं। यहाँ आप रिटर्न्स के आधार पर यह तय नहीं कर पाओगे की कौनसा म्यूच्यूअल फण्ड बढ़िया हैं। यहाँ पर ABC फण्ड का शार्प रेश्यो XYZ फण्ड की तुलना में ज्यादा हैं तो इन दोनों में ABC फण्ड ज्यादा अच्छा माना जायेगा। क्योकि ABC म्यूच्यूअल फण्ड आपको कम रिस्क पर ज्यादा रिटर्न रहा हैं।

Sharpe Ratio Formula

Sharpe Ratio = RP – RF / σ

  • RP = The Expected Returns on Investor Portfolio
  • RF = The Risk Free Rate of Return
  • σ = The Portfolio Standard Deviation , A measures of Risk

what is mutual fund ratio in hindi

Standard Deviation Ratio

SD Ratio in Mutual Funds – SD Ratio किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड की परफॉरमेंस की एक रेंज (Range) बताता हैं। रेंज का मतलब हैं की फण्ड अधिकतम और न्यूनतम कितना रिटर्न्स दे सकता हैं। SD अपने औसत रिटर्न्स के सम्बन्ध में फण्ड के रिटर्न की अस्थिरता को मापता हैं। यह रेश्यो आपको बताता हैं की फण्ड का रिटर्न उसके हिस्टोरिकल average return से कितना अलग (deviate) हो सकता हैं।

Standard Deviation Ratio को आप इस उदाहरण की सहायता से समझ सकते हैं।

माना की Axis Bluechip Fund का Avg. Rate of Return 15% हैं और इसका स्टैण्डर्ड डेविएशन (SD) 3% हैं। तो यहाँ रिटर्न रेंज क्या होगी?

अधिकतम रिटर्न – 15 %  +  3 % = 18 %

न्यूनतम रिटर्न –  15 %  –  3 % = 12 %

इस प्रकार इस म्यूच्यूअल फण्ड की रिटर्न की रेंज 12 से 18% के बीच होगी।

SD Ratio कम होने पर फण्ड की रेंज कम होगी और जिसके कारण फण्ड में कम volatility होगी फलस्वरूप फण्ड कम रिस्की होगा। SD Ratio ज्यादा होने पर फण्ड की रेंज ज्यादा होगी जिससे फण्ड में रिस्क और volatility ज्यादा होगी। 

इसलिए Standard Deviation जितना कम हो उतना अच्छा माना जाता हैं।

Mutual Fund Ratios की जानकारी कहाँ से प्राप्त करें?

आप सभी Mutual Fund Ratios की जानकारी value research और Money control की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। आपको यहाँ सभी महत्वपूर्ण Mutual Fund Ratios के बारे में जानकारी मिल जाएगी।

निष्कर्ष

म्यूच्यूअल फंड का चयन करते समय आपको ऊपर दिए गए सभी Mutual Fund Ratios अवश्य देखने चाहिए। इससे आप एक अच्छे म्यूच्यूअल फंड का चयन कर सकेंगे।

दोस्तों, अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो अपने मित्रो के साथ जरूर शेयर करे।

Leave a Reply