शेयर मार्केट का गणित | मुनाफा कमाने का सटीक तरीका

यदि आप भी शेयर मार्केट सीखना चाहते हैं और उससे पैसा कमाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले शेयर मार्केट का गणित समझना होगा। अगर आपने शेयर मार्केट का गणित सही तरीके से समझ लिया तो आप नासमझी में किए गए शेयर मार्केट के नुकसान से बच जाएंगे और अच्छा पैसा कमा पाएंगे।

दोस्तों, हमें शुरू से बताया जाता हैं की शेयर मार्केट एक सट्टा मार्केट हैं। इसकी वजह से कई लोगों के अंदर तो शेयर बाजार का नाम सुनते ही भय पैदा हो जाता है। लेकिन यदि आपने शेयर बाजार के गणित को सही तरीके से समझ लिया तो मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इसके सही कांसेप्ट को समझकर long-term में अच्छा पैसा बना सकते हैं।

आज हम इस आर्टिकल में शेयर मार्केट के गणित को अच्छी तरह से समझेंगे जिसमें आपको शेयर मार्केट का गणित PDF भी मिल जायेगा। इस आर्टिकल में आपको अपने सभी सवालों का जवाब प्राप्त हो जाएगा।

शेयर मार्केट का गणित समझना क्यों जरुरी हैं?

शेयर मार्केट का गणित समझना क्यों जरूरी है इसको मैं आपको एक आसान उदाहरण से समझाता हूँ।

आप ही बताइए कि आप एक 20, 30 हज़ार की नौकरी पाने के लिए अपनी जिंदगी के लगभग 25 वर्ष पढ़ाई करते हैं। उसके बाद में आपको जाकर कहीं नौकरी मिलती है और उसकी भी कोई गारंटी नहीं होती है। वही आप डॉक्टर या CA बनने के लिए लगभग 4 से 5 साल की पढ़ाई एक्स्ट्रा करते हैं।

लेकिन जब शेयर मार्केट से पैसा कमाने की बात आती हैं तो आप इसके लिए कुछ सीखना नहीं चाहते और सीधा शेयर मार्केट में घुसकर प्रॉफिट कमाना चाहते हैं। जो कि मेरी राय में एक गलत चीज है। जहां पर भी पैसा इन्वॉल्व होगा वहां पर आपको सीखना पड़ेगा और समझना पड़ेगा कि उस चीज से पैसा कैसे कमाए। इसलिए शेयर मार्केट का गणित समझना जरूरी है।

शेयर मार्केट का गणित

Share market ka Ganit

(1) शेयर मार्केट शब्दवाली को समझें

यदि एक नया निवेशक शेयर मार्केट में आता है तो उसे सबसे पहले शेयर मार्केट शब्दावली को समझना चाहिए। क्योंकि शेयर मार्केट में ऐसी अनेक टर्म्स होती है जिनको एक नए निवेशक को समझना बहुत जरूरी होता है। जब तक आपके बेसिक कांसेप्ट क्लियर नहीं होंगे आपको शेयर मार्केट का गणित बिल्कुल भी समझ में नहीं आएगा।

(2) जल्दी पैसा कमाने का प्रयास न करें

अधिकतर निवेशक शेयर मार्केट में जल्दी पैसा कमाने के मकसद से आते हैं। यह बात आप गांठ बांध लीजिए कि शेयर मार्केट में जल्दी पैसा कमाना यानि कि बहुत ज्यादा रिस्क उठाना।

इसके लिए आपको शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग जैसे कि इंट्राडे F&O करने पड़ेंगे जिसमें बहुत ज्यादा रिस्क होती है। बिना सीखें आप पैसा कमाना तो छोड़िये इसमें कैपिटल बचाना मुश्किल हो जाता हैं। इसलिए बिना सोचे-समझे कभी भी शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग ना करें।

(3) शेयर मार्केट की पूरी प्रोसेस समझें

शेयर मार्केट का गणित आपको तब अच्छी तरह से समझ में आएगा जब आप शेयर मार्केट की संपूर्ण प्रक्रिया को समझेंगे। इसमें आपको थोड़ा समय देना होगा। लेकिन यदि आप थोड़ा बहुत समय देकर अच्छी तरह से शेयर मार्केट की संपूर्ण प्रक्रिया समझ लेते हैं तो आपकी आगे की राह बिल्कुल आसान हो जाएगी।

इसलिए आपको कंपनी के आईपीओ से लेकर उसकी लिस्टिंग, उसके बाद में शेयर कैसे खरीदें और बेचे, कंपनी के शेयर के दाम ऊपर और नीचे क्यों होते हैं, ये सब समझना होगा। इससे आप बेसिक नॉलेज प्राप्त कर पाएंगे जो आपके फंडामेंटल एनालिसिस में मदद करेगा।

(4) फंडामेंटल एनालिसिस का गणित

शेयर मार्केट में फंडामेंटल एनालिसिस सीखना बहुत जरूरी है। यदि आप long-term के लिए एक अच्छे निवेशक बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करना आना जरूरी है। इसमें आपको कंपनी क्या बिजनेस करती है, कैसे पैसे कमाती है, उसकी रेवेन्यू कहां कहां से आती है, उसके फाइनेंसियल स्टेटमेंट कैसे हैं, रेश्योस और उसके मैनेजमेंट के हिसाब से उस कंपनी का एनालिसिस करना होता है।

कुल मिलाकर आपको फंडामेंटल एनालिसिस से सीखना होता है कि एक अच्छा शेयर कैसे चुने। यदि आप फंडामेंटल एनालिसिस करना सीख जाते हैं तो आप यह समझ लीजिए कि आप शेयर मार्केट का गणित लगभग लगभग सीख चुके हैं।  क्योंकि लॉन्ग टर्म निवेश ही शेयर मार्केट में कंपाउंडिंग के द्वारा प्रॉफिट कमा पाता है।

(5) पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का गणित

स्टॉक मार्केट में रिस्क को मैनेज करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस कड़ी में पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

मान लीजिए आपके पास में ₹5,00,000 है जिसे आप शेयर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। आप पूरे ₹5,00,000 किसी एक कंपनी में इन्वेस्ट कर देते हैं। आपका ये निवेश गलत साबित होता है जिसकी वजह से कंपनी डूब जाती है। इस केस में आपको बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा।

लेकिन यदि आपने उन ₹5,00,000 से 10 अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया होता और यदि एक-दो कंपनी डूब भी जाती तभी भी आपके पोर्टफोलियो पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता।

इसलिए पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना बहुत जरूरी है। कभी भी अपना पैसा किसी एक-दो स्टॉक में ना लगाएं बल्कि लगभग 10-20 स्टॉक्स का एक अच्छा पुल बनाएं जिससे जिसमें आप निवेश कर सकते हैं। आपको बहुत ज्यादा मात्रा में भी स्टॉक नहीं खरीदने हैं जिससे कि आप उन्हें ट्रैक ही ना कर पाए। इसलिए एक उचित पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है।

(6) पॉवर ऑफ़ कम्पाउंडिंग का गणित

स्टॉक मार्केट में पावर आफ कंपाउंडिंग को समझना बहुत जरूरी है। यदि आप पावर आफ कंपाउंडिंग के खेल को समझ जाते हैं तो आप अच्छी वेल्थ का निर्माण कर सकते हैं। यह एक बहुत बड़ा टॉपिक है लेकिन इसे मैं एक आसान एग्जांपल से समझाता हूं जिससे कि आपको पावर आफ कंपाउंडिंग का महत्व पता चल जायेगा।

निवेश ₹ 5,00,000 ₹ 5,00,000
रेट ऑफ़ रिटर्न 15% 15%
निवेश की अवधि 20 वर्ष 25 वर्ष
मैच्योरिटी राशि ₹ 98.6 लाख ₹ 207.7 लाख

ऊपर वाले उदाहरण में आप देख सकते हैं कि पहला निवेश 20 वर्ष के लिए रखा गया है तब जाकर वह लगभग एक करोड रुपए के आसपास हो रहा है।

जबकि अगर उसी निवेश को आप 5 वर्ष ओर अधिक होल्ड करते हैं तो वह पैसा लगभग 2.08 करोड रुपए हो जाता है। मतलब की जितना पैसा 20 साल में बना हैं उतना आप आप अगले 5 साल में बना लेंगे। आप जितना ज्यादा निवेश को होल्ड करेंगे उतना अधिक प्रॉफिट आपको होता जाएगा। इसे कहते हैं पैसे से पैसा बनना।

(7) महत्वपूर्ण रेश्यो के बारें में जानकारी रखें

शेयर मार्केट में किसी कंपनी के फाइनेंसियल से सम्बंधित कई रेश्यो होते है जिनकी आपको जानकारी होनी जरुरी होती हैं। कुछ रेश्यो आपको शेयर ख़रीदने से पहले देखने होते है जबकि कुछ शेयर खरीदने के बाद मॉनिटरिंग के रूप में देखने होते है।

ये फाइनेंसियल रेश्यो शुरुवात में आपको कठिन लग सकते है लेकिन धीरे-धीरे आपको ये आसान लगने लगेंगे। ये फाइनेंसियल रेश्यो आप देख सकते हैं:

  • PE रेश्यो
  • EPS
  • प्राइस टू बुक वैल्यू
  • करंट रेश्यो और क्विक रेश्यो
  • EBITDA मार्जिन
  • ROE और ROCE

(8) शेयर से फायदा

शेयर मार्केट का गणित समझने के लिए जरुरी हैं की आपको ये अच्छी तरह से पता हो की शेयर ख़रीदने से फायदा कैसे होता हैं। जब भी आप शेयर खरीदते हैं तो आप दो तरह से फायदा कमा सकते हैं –

  1. शेयर के मूल्य में बढ़ोतरी से
  2. डिविडेंड प्राप्त करके

उदाहरण के लिए यदि आप किसी शेयर को ₹100 में खरीदते हैं और कुछ समय बाद उसका प्राइस बढ़ जाता हैं। यदि आप उस शेयर को ₹110 पर बेच देते हैं तो आपको ₹10 का फायदा हो जाएगा।

दूसरा आपको डिविडेंड प्राप्त होता हैं। कंपनियां अपने शेयर धारकों नियमित अंतराल पर लाभांश का भुगतान करती रहती हैं। ये डिविडेंड सीधा आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट होता हैं जो की आपके डीमैट अकाउंट से लिंक होता हैं।

(9) निवेश और ट्रेडिंग का गणित

शेयर मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग के दो तरीके हैं। यदि आप स्टॉक मार्केट में कोई शेयर खरीदते हैं तो आप उसे कुछ सेकंड से लेकर कई सालों तक (जब तक चाहे) अपने पास होल्ड रख सकते हैं।

ट्रेडिंग:

जब आप कोई शेयर खरीदते हैं और उन्हें कुछ मिनट से लेकर कुछ महीनों के अंदर ही बेच देते हैं तो उसे ट्रेडिंग कहा जाता हैं।

  • इंट्राडे : जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं और उन्हें उसी दिन बेच देते हैं तो यह इंट्राडे या डे ट्रेडिंग कहलाती हैं। ये रिस्की ट्रेडिंग होती हैं।
  • Swing Trading : ख़रीदे हुए शेयर्स को कुछ दिन या कुछ महीनों तक रखकर बेच देते हैं तो इसे स्विंग ट्रेडिंग कहा जाता हैं।
  • F&O ट्रेडिंग : इस ट्रेडिंग में स्टॉक, निफ़्टी और बैंक निफ्टी के कॉल और पुट में ट्रेडिंग की जाती है। इसे फ्यूचर & ऑप्शन ट्रेडिंग के नाम से जाना जाता हैं। ये ट्रेडिंग बहुत ज्यादा expertise मांगती हैं।

निवेश:

शेयर मार्केट में जब शेयर खरीदकर लम्बे समय तक होल्ड किये जाते हैं जो की आमतौर पर 1 वर्ष से अधिक होता हैं तो इसे निवेश कहा जाता है। निवेश और ट्रेडिंग दोनों को करने का अलग-अलग मकसद होता हैं।

ट्रेडिंग में ट्रेडर अल्प समयावधि में शेयर्स के प्राइस मूवमेंट को समझकर प्रॉफिट बनाने की कोशिश करते हैं। दूसरी ओर निवेश में शेयर/कंपनी के फंडामेंटल के साथ में बिजनेस को समझकर लंबे समय के लिए बड़े प्रॉफिट के लिए निवेश किया जाता हैं।

(10) मार्केट कैप का गणित समझे

शेयर मार्केट में निवेश करते समय कंपनियों के मार्केट कैप का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। मार्केट कैप से आप ये तय कर पाते हैं कि आप अपनी रिस्क कैपेसिटी के अनुसार किस प्रकार की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। मार्केट कैप के आधार पर कंपनियों को तीन भागों में बांटा जा सकता है:

स्मॉल कैप : स्मॉल-कैप वे कंपनियां होती जिनका मार्केट कैप ₹ 5,000 करोड से कम होता है। ये रिस्की कंपनिया होती हैं।

मिड कैप : यह वे कंपनियां होती जिनका मार्केट कैप ₹ 5,000 करोड़ से ₹ 20,000 करोड़ रुपये के बीच रहता है। इन कंपनियों में मॉडरेट रिस्क होती हैं।

लार्ज कैप : लार्ज-कैप वह कंपनियां होती जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹ 20,000 करोड़ या अधिक होता है। इनमें अपेक्षाकृत कम रिस्क होती हैं।

मार्केट कैप को निम्न सूत्र से निकाला जाता हैं –

मार्केट कैप = शेयरों की कुल संख्या X एक शेयर का वर्तमान बाजार मूल्य (CMP)

(11) शेयर मार्केट गिरावट में ख़रीदने का गणित

शेयर मार्केट में कई बार ऐसा होता है कि स्टॉक मार्केट क्रैश कर जाता है। यानि कि यह लगभग पांच-छः दिन में 10-20% के आस-पास गिर जाता है जो अधिक भी हो सकता है। ऐसी स्थितियों में अधिकतर निवेशक स्टॉक मार्केट को छोड़कर भाग जाना चाहते हैं और अपना निवेश बेचकर निकल जाते हैं।

लेकिन यदि आप एक समझदार निवेशक हैं और भविष्य में स्टॉक मार्केट पर विश्वास करते हैं तो आप अच्छे और क्वालिटी स्टॉक्स को उस समय डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं। इससे आपको long-term में काफी अच्छा फायदा मिलता है।

इसलिए शेयर मार्केट में गिरावट की स्थितियों में खरीदारी हमेशा फायदेमंद होता है। यदि आप बढ़ते हुए मार्केट में लगातार खरीदते जाएंगे तो आपके पास में मार्जिन आफ सेफ्टी कम होता जाएगा।

ये भी पढ़े:

शेयर मार्केट का गणित PDF

शेयर मार्केट का गणित PDF आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं: –

FAQ

  1. शेयर मार्केट का गणित क्या है?

    शेयर मार्केट का गणित एक बहुत बड़ा टॉपिक हैं। इसका मुख्य उद्देश्य हैं की निवेशक के प्रॉफिट को अधिक बनाना जिससे नुकसान कम से कम हो।

  2. शेयर खरीदने से पहले क्या देखना चाहिए?

    शेयर ख़रीदने से पहले कंपनी का बिज़नेस एनालिसिस करना चाहिए, फाइनेंसियल और इंडस्ट्री को समझना चाहिए। साथ ही मैनेजमेंट के बारे में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

  3. शेयर मार्केट का संपूर्ण ज्ञान कैसे लें?

    तुरंत शेयर मार्किट का पूरा ज्ञान लेना काफी मुश्किल हैं। इसे आपको लगातार सीखना होता हैं। शेयर बाजार को आप बुक्स, वीडियोस, प्रैक्टिस के माध्यम से सीख सकते हैं। इस प्रकार आप शेयर मार्केट का गुरु ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

आज के समय में निवेश करना बहुत महत्वपूर्ण हो चुका है। यदि आप निवेश नहीं करेंगे तो मुद्रास्फीति की वजह से आपको नुकसान होता रहेगा। इसलिए आपको कोई बेहतरीन निवेश की तलाश करके उसमें निवेश जरूर करना चाहिए। शेयर मार्केट एक बेहतरीन निवेश विकल्प है बशर्ते कि आप शेयर मार्केट का गणित सही से समझ जाए।

यदि आप सही तैयारी के साथ में शेयर मार्केट में उतरेंगे तो आपको निश्चित तौर पर फायदा होगा और यदि आप बस सट्टा बाजी करने के लिए स्टॉक मार्केट में आना चाहते हैं तो आपको नुकसान होने से कोई नहीं बचा सकता। इसलिए मेरी राय में आपको शेयर मार्केट को पहले सीखना चाहिए और उसके बाद में आपको इसमें निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए।

तो दोस्तों आज आपने इस आर्टिकल में सीखा शेयर मार्केट का गणित और आपने शेयर मार्केट का गणित PDF भी डाउनलोड जरूर कर लिया होगा तो मैं देखिए आर्टिकल आपको अच्छा लगा होगा इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और यदि आपके कोई सवालिया सुझाव है तो मुझे कमेंट के माध्यम से बता सकते हैं। 

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