किस कंपनी के शेयर खरीदे | आसानी से चुने मल्टीबेगर स्टॉक

आज के समय में शेयर मार्केट से कई लोग पैसा कमाना चाहते हैं। इसके लिए वे हमेशा सोचते रहते हैं कि किस कंपनी के शेयर खरीदे जिससे उनको मोटा प्रॉफिट हो।

तो देखिये दोस्तों, मैं आपको अपने अनुभव से बताता हूं कि स्टॉक मार्केट में 98% लोग पैसा कमाने में नाकाम हो जाते हैं। आप पैसा कमाने के बारे में छोड़िए वे अपना बहुत बड़ा नुकसान करके शेयर मार्केट से निकलते हैं। इसका एक सीधा सा कारण होता है उन्हें बिल्कुल पता नहीं होता कि किस कंपनी के शेयर खरीदे।

वे बस लोगों के टिप्स के आधार पर शेयर खरीदते और बेचते हैं। साथ में बिना सोचे-समझे इंट्राडे और F&O में ट्रेड करने लग जाते हैं।

परिणामस्वरूप वे स्टॉक मार्केट में बड़ा नुकसान उठाते हैं जिसकी वजह से वे स्टॉक मार्केट को एक जुआ समझ कर हमेशा के लिए छोड़ देते हैं। साथ ही वे शेयर मार्केट से करोड़ों की वेल्थ बनाने का अवसर भी गंवा देते हैं।

लेकिन दोस्तों आप यह गलती ना करें इसके लिए मैं लेकर आया हूं किस कंपनी के शेयर खरीदे का यह आर्टिकल। जिससे आप सीख पाएंगे कि बेस्ट शेयर कैसे चुने जाते हैं जो आपको शानदार मुनाफा कमा कर दें।

किस कंपनी के शेयर खरीदे | Kis Company ke share Kharide

aaj kis company ke share kharide

किसी भी कंपनी का शेयर खरीदना यानि कि आपका उस कंपनी के बिजनेस में पैसा लगाना। इसलिए आपको अपने पैसे सोच-समझकर एक बढ़िया कंपनी में लगाने चाहिए। मैं आपको किसी भी शेयर को खरीदने के लिए एक चेक लिस्ट बता रहा हूं जिसकी मदद से आप एक बढ़िया कंपनी चुन सकते हैं।

[1] कंपनी का सेक्टर समझे

भारतीय स्टॉक मार्केट में हजारों कंपनियां लिस्टेड हैं। इतनी सारी कंपनियों में से आपके लिए बेस्ट कंपनी चुनना काफी मुश्किल काम हो सकता हैं। आपको सबसे पहले आप उस सेक्टर की पहचान करनी चाहिए जिसमें आपको ग्रोथ की संभावनाएं नजर आ रही हैं।

सेक्टर का मतलब जैसे के बैंकिंग सेक्टर, IT सेक्टर, फार्मा सेक्टर, FMCG सेक्टर आदि। बदलते हुए ज़माने के साथ पुराने प्रोडक्ट लाने वाली कंपनियों को आपको नजर अंदाज करना चाहिए, जैसे की टाइपराइटर, डीवीडी प्लेयर बनाने वाली कंपनियों का कोई भविष्य नहीं हैं।

आपको हमेशा ऐसे सेक्टर का चुनाव करना चाहिए जिसका भविष्य में व्यापार बढ़ने की संभावनाएं हो। जैसे की Insurance सेक्टर अभी भारत में शुरुवाती स्टेज में हैं तो इंश्योरेंस सेक्टर वाली कंपनियां भविष्य में अच्छा प्रॉफिट कमा कर दे सकती हैं। 

इसके अन्य कुछ उदाहरण हैं EV सेक्टर, क्रेडिट कार्ड कंपनीज।  

इसलिए आप कंपनी द्वारा बनाये जाने वाले प्रोडक्ट्स के बारे में सोचिये क्या लोग उन्हें आने वाले 10 से 15 साल बाद भी प्रयोग करेंगे। जैसे की HUL कंपनी के प्रोडक्ट्स आपको 90% घरों में मिल जायेंगे और आने वाले समय में भी निरंतर उनका उपयोग होता रहेगा। 

[2] मार्केट लीडर या मोनोपॉली बिज़नेस

किस कंपनी के शेयर खरीदे इसका एक उत्तर ये भी हैं की वो कंपनी मार्केट लीडर या मोनोपॉली बिज़नेस वाली होनी चाहिए।हालाँकि ये दोनों कंडीशन पूरी होना बहुत कठिन काम हैं।

लेकिन यदि आप ऐसी कंपनी को ढूंढ लेते हो तो वो कंपनी आपको बहुत ही बढ़िया रिटर्न बनाकर दे सकती हैं। अगर कोई कंपनी मार्केट लीडर नहीं भी हैं तो उसका मार्केट में शेयर अच्छा-खासा होना चाहिए।

जैसे की IEX, IRCTC, CDSL, Cams, ITC जैसी कंपनिया मोनोपॉली व्यवसाय वाली हैं। वही दूसरी ओर Asian Paints, Pidilite, HUL, HDFC AMC जैसी कंपनिया मार्केट लीडर वाले स्टॉक हैं।

यदि आप लम्बी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो ऐसी कंपनिया आपको बहुत ही सतत रिटर्न्स बनाकर देती हैं। साथ ही इस प्रकार के शेयर्स में रिस्क की मात्रा भी काफी कम रहती हैं।

हालांकि यदि आप ऐसे निवेशक हैं जो हाई रिस्क लेना पसंद करते हैं तो आप कुछ रिस्की और छोटी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। लेकिन इस प्रकार के स्टॉक्स में बहुत ही ज्यादा जोखिम होता हैं जो मल्टी बेगर रिटर्न्स के साथ-साथ बहुत बड़ा नुकसान भी दे सकते हैं।

ये भी पढ़े :

[3] कंपनी के बिज़नेस मॉडल को समझे

अधिकतर निवेशक बिना एनालिसिस किये स्टॉक टिप्स के आधार पर कोई भी कंपनी के शेयर खरीद लेते हैं। वे ये सोचकर शेयर खरीदते हैं की वो शेयर उन्ही बहुत बड़ा मुनाफा देगा। उन्हें ये तक भी पता नहीं होता कि वो कंपनी वास्तव में क्या बिजनेस करती है।

विश्व के महानतम निवेशक मिस्टर वारेन बफेट ने कहा हैं की, ”वे कभी ऐसे बिज़नेस में इन्वेस्ट नहीं करते जिसे वो समझते नहीं”

ये नियम आपको भी निश्चित तौर पर फॉलो करना चाहिए। किसी कंपनी के शेयर खरीदने का मतलब हैं की आप उस बिज़नेस में अपना मेहनत का पैसा लगा रहे हैं। इसलिए आपको ये पता होना चाहिए की कंपनी आखिर आपके पैसे का कर क्या कर रही हैं।

अगर आप कंपनी के बिजनेस को सही ढंग से नहीं समझेंगे तो आपको कंपनी के द्वारा किए जाने वाले कार्य व उत्पाद परिवर्तन समझ नहीं आएंगे। इसकी वजह से आप व्यापार के वर्तमान व भविष्य के हालात का अनुमान लगाने में मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

इसलिए हमेशा इन बातों का जरूर ध्यान रखे –

  • कंपनी क्या व्यवसाय कर रही हैं और किस तरह पैसा कमा रही हैं।
  • मार्केट में कंपनी के कौन-कौन से उत्पाद (products) उपलब्ध हैं या कंपनी किस प्रकार की सर्विसेज दे रही हैं?
  • जिन प्रोडक्ट्स को आप प्रयोग कर रहे हैं वो कंपनियां वैल्यू करने में आसान होती हैं।
  • कंपनी के टारगेट उपभोक्ता कौन हैं?

अब आप ये पूछेंगे की पता कैसे करे की कंपनी क्या कर रही हैं?

कोई कंपनी क्या बिज़नेस कर रही हैं इसके पता आप निम्न पॉइंट्स की मदद से लगा सकते हैं –

  • आपको कंपनी की ऑफिसियल वेबसाइट पर कंपनी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज देखनी चाहिए।
  • यदि कोई कंपनी सर्विस सेक्टर में हैं तो आप उस कंपनी के क्लाइंट्स देखिये। कही ऐसा तो नहीं की कंपनी की अधिकांश रेवेन्यू गिने-चुने क्लाइंट्स से ही आ रही हैं। अगर ऐसा है तो ये काफी रिस्की भी हो सकता हैं।
  • कंपनी के क्लाइंट्स का पता आप एनुअल रिपोर्ट या ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट (रिसर्च रिपोर्ट) से लगा सकते हैं। ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट आप गूगल पर सर्च करके निकाल सकते हैं।
  • आप कंपनी की अंतिम 2-3 वर्ष की एनुअल रिपोर्ट्स (Annual Report) पढ़ सकते हैं। एनुअल रिपोर्ट को अच्छे से पढ़ने से आपको पूरी तरह से समझ में आ जायेगा की कंपनी किस तरह पैसा बनाती हैं। आप Screener और Ticker.finology जैसी वेबसाइट से आसानी से एनुअल रिपोर्ट निकाल सकते हैं।

[4] कंपनी के फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स देखें

आप में से कई लोगों को ऐसा लगता होगा की फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स पढ़ना काफी मुश्किल होता होगा। लेकिन यकीन मानिए दोस्तों अगर आप बस थोड़ी बहुत जानकारी के साथ भी फाइनेंसियल डाटा आराम से समझ सकते हैं।

आपको जो भी शेयर भविष्य के आधार पर अच्छा लग रहा हो, उस स्टॉक के पिछले 3 से 5 वर्ष के फाइनेंसियल डाटा (Financial Data) को जरूर देखे। इसमें आपको बैलेंस शीट, इनकम स्टेटमेंट, कैश फ्लो और फाइनेंसियल रेश्यो देखने चाहिए।

शुरुवाती दौर में मैं आपको जैसा बताता हूँ आप वैसा देखिये। बाद में आप अपने ज्ञान को ओर बढ़ा सकते हैं।

बैलेंस शीट में क्या देखना चाहिए 

  • कंपनी रिज़र्व एंड सरप्लस (Reserve & Surplus) देखें, इसमें आप देखे की कहीं कंपनी रिज़र्व एंड सरप्लस में पिछले कुछ वर्षो से कमी तो नहीं आ रही। कंपनी के रिज़र्व एंड सरप्लस बढ़ना कम्पनी के हित में होता हैं।
  • कंपनी के दायित्व (Liabilities) का ट्रेंड देखे। Liabilities अगर कम होगी तो उसे सही माना जाता हैं। कंपनी के दायित्व कंपनी की देनदारियां होती हैं।
  • कंपनी की फिक्स्ड एसेट और करंट एसेट (Fixed Asset & Current Assets) का मूल्य जांचे। पिछले 3-5 वर्षो में देखे कहीं इनके मूल्य में गिरावट तो नहीं आ रही हैं।
  • आप करंट एसेट के कॉलम में देखे की Trade Receivable कितने हैं? यदि ये टोटल करंट एसेट के 50-60% है तो ये खतरे की घंटी हैं। Trade Receivable यानि की माल उधार पर बेचा गया हैं जिसका पैसा अभी कंपनी को मिलना बाकी हैं। ये पूरा पाया रिकवर हो जाये इसकी संभावनाएं कम ही होती हैं।

इनकम स्टेटमेंट या P & L Account में क्या देखना चाहिए 

  • इसमें आप पिछले 3-5 वर्ष के सेल्स डाटा (sales) को देखे। Sales में अगर वृद्धि हो रही हैं तो इसका मतलब हैं की कंपनी लगातार ग्रो कर रही हैं। अगर बिक्री में वृद्धि हर साल 10% से अधिक हो तो बढ़िया माना जाता हैं।
  • बाद में आप कंपनी के Net Profit को देखे। Net Profit का पिछले कुछ सालों का विवरण देखे। अगर लाभ वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा हैं तो ये कंपनी के के लिए बहुत ही बढ़िया हैं। साथ ही आप ऑपरेटिंग प्रॉफिट का ट्रेंड भी देख सकते हैं।
  • कंपनी के EBIDTA मार्जिन देखें।

kis company ke share kharide

Cash Flow में क्या देखना चाहिए 

  • किसी भी कंपनी में मुख्यतः 3 प्रकार की गतिविधियों से cash flow होता होता हैं। 1. Operating 2. Investing 3. Financing.
  • कंपनी के सुचारु रूप से संचालन के लिए Positive Cash Flow होना जरुरी हैं। इसलिए पिछले कुछ समय के Cash Flow के आंकड़े जरूर चेक करे।
  • कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो पॉजिटिव होना बहुत जरुरी हैं। साथ ही इसमें प्रति वर्ष वृद्धि भी जरुरी हैं।
  • कंपनी में कुछ Free Cash Flow की भी होना चाहिए। Free Cash Flow कंपनी के Cash Outflow के बाद बचने वाला फ्री कैश होता हैं। फ्री कैश फ्लो जितना अधिक होगा कंपनी के लिए उतना फायदेमंद होगा।

फाइनेंसियल रेश्यो में क्या देखना चाहिए 

  • कंपनी का करंट रेश्यो कम से कम 1 होना चाहिए और Quick Ratio 2 से कम नहीं होना चाहिए। 
  • Debt to Equity रेश्यो 1 से कम होना चाहिए।
  • अंतिम 5 वर्षो में प्रॉफिट ग्रोथ न्यूनतम 8 से 10% तो होनी ही चाहिए।  

[5] कंपनी के ऊपर कितना कर्ज (Debt) हैं?

किस कंपनी के शेयर खरीदे का एक महत्वपूर्ण जवाब हैं कंपनी के ऊपर ऋण। किसी कंपनी के स्टॉक को चुनते समय आपको उस कंपनी पर कितना कर्ज हैं, जरूर देखना चाहिए।

यदि किसी कम्पनी के ऊपर ज्यादा ऋण हैं तो उस कर्ज के ऊपर बहुत ज्यादा ब्याज (interest) भी देना पड़ता हैं। अगर कोई कंपनी निरंतर interest का भुगतान करती रहती हैं तो उसके प्रॉफिट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं।

इसलिए आप जिस कंपनी में निवेश करना चाह रहे हो तो उस कंपनी के ऊपर कम से कम ऋण होना चाहिए। एक कर्ज मुक्त (Debt Free) कंपनी को आप ज्यादा तवज्जो दे सकते हैं।

अब एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता हैं की आखिर पता कैसे करें की कोई कंपनी पर कर्ज कम हैं या ज्यादा?

कर्ज ज्यादा हैं या कम इसके लिए आप कम्पनी का Debt to Equity Ratio देख सकते हैं। Debt-Equity Ratio अगर 1 से कम हो तो अच्छा माना जाता है। यह रेश्यो अगर जीरो हो तो यह एक आदर्श रेश्यो माना जाता हैं।

साथ ही ऐसी कंपनी जिसके पास उसके कर्ज के मुकाबले अच्छा-खासा Cash हैं उसे भी आप डेब्ट-फ्री कंपनी मान सकते हैं। जैसे की ABC Ltd के ऊपर ₹500 करोड़ का कर्ज हैं जबकि कंपनी के पास में ₹600 करोड़ का कैश पड़ा हैं तो ये कंपनी वर्चुअली डेब्ट फ्री कंपनी मानी जाएगी।

[6] RoE और RoCE जरूर देखें

ROE और RoCE दोनों रेश्यो किसी भी शेयर को चुनते समय सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ये रेश्यो आपको बताते हैं की कंपनी की लगाई हुई इक्विटी या कैपिटल पर कितना रिटर्न बना रही हैं।

RoE – Return on Equity रेश्यो आपको बताता हैं की कंपनी अपनी इक्विटी पर कितना पैसा या रिटर्न बना रही हैं। अगर आसान भाषा में समझे तो कम्पनी के लगाए पैसे पर कितना पैसा बन रहा हैं।

मान लीजिये XYZ Ltd. में ₹100 की शेयर कैपिटल हैं और ₹100 के रिज़र्व हैं। तो इस प्रकार कंपनी की कुल इक्विटी हुई ₹200. और माना की इस साल कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹50 का रहा।

तो यहाँ XYZ Ltd. का ROE होगा –

[RoE = Net Profit / Total Equity]      ₹50 / ₹200 = 25%

25% ROE का मतलब हुआ की कंपनी प्रत्येक ₹100 पर ₹25 कमा रही हैं।

RoCE – Return on Capital Employed रेश्यो हमें बताता हैं की कंपनी ने अपने कुल लगाए हुए पैसो या कुल इन्वेस्टमेंट पर कितना रिटर्न कमाया हैं।

मान लीजिये की XYZ Ltd. में ₹100 की शेयर कैपिटल हैं और साथ ही ₹100 के रिज़र्व हैं। इसके अतिरिक्त कंपनी ने ₹100 का कर्जा (debt) भी लिया हैं। तो यहाँ कंपनी के द्वारा लगाई हुई कैपिटल ₹300 हुई।

मान लेते हैं की इस साल कंपनी का EBIT (Earning before interest and tax) ₹100 रहा। तो यहाँ XYZ Ltd. का RoCE होगा –

[RoCE = EBIT / Capital Employed]      ₹100 / ₹300 = 33.33%

अब आप ये पूछेंगे की ROE और RoCE में अंतर क्या होता हैं?

दोस्तों, यदि आप ऐसी कंपनी को देख रहे हैं जिस पर कोई भी कर्ज नहीं हैं तो आप RoE देख सकते हैं। वही अगर किसी कंपनी ने कर्ज ले रखा हैं तो उस कंपनी में RoE भ्रामक जानकारी दे सकता हैं। क्योंकि RoE में कर्ज शामिल नहीं होता। इसलिए जिस कंपनी में Debt हैं उस कंपनी में आपको हमेशा RoCE ही देखना चाहिए।  

आमतौर पर 10% से अधिक ROE और RoCE वाली कंपनियां बढ़िया मानी जाती हैं।

आपको ये सभी फाइनेंसियल जानकारियां मनी कण्ट्रोल और टिकर टेप जैसी वेबसाइट पर मिल जाएगी।

[7] P/E Ratio देखे

P/E रेश्यो का अर्थ होता हैं Price to Earning Ratio.

कंपनी के एक शेयर की मार्केट प्राइस (market price) में कंपनी के EPS का भाग देकर P/E Ratio निकाला जाता है।

P/E Ratio = Market Price Per Share / EPS 

यदि ऊपर दिए गए उदाहरण में XYZ Ltd. कंपनी का EPS ₹10 प्रति शेयर हैं और इस कंपनी के स्टॉक की करंट मार्केट प्राइस ₹300 हो तो यहां P/E Ratio होगा।

P/E Ratio = ₹300 / ₹10 = 30

इस 30 के P/E रेश्यो का मतलब हुआ की आपको एक वर्ष में ₹10 (EPS) कमाने के लिए 30 गुना पैसे देने होंगे। यानि की  आपको एक शेयर के लिए ₹300 देने होंगे।

दोस्तों, P/E Ratio कभी भी फिक्स नहीं होता हैं ये शेयर प्राइस के साथ निरंतर बदलता रहता हैं।

P/E से कैसे पता करें शेयर सस्ता हैं या महंगा?

ऊपर वाले उदाहरण में आपको कंपनी का P/E रेश्यो 30 दिखाई दे रहा हैं। लेकिन अब आप ये कैसे तय करेंगे की यह शेयर सस्ता हैं या महंगा?

ये जज करने के लिए आपको सम्बंधित कंपनी की इंडस्ट्री या सेक्टर का P/E देखना होगा। मान लेते हैं की X Ltd. जो की एक फार्मा सेक्टर की कंपनी हैं और फार्मा सेक्टर का वर्तमान में P/E 40 का चल रहा हैं। इसका मतलब हुआ की X Ltd. का शेयर आपको इंडस्ट्री के P/E के मुकाबले सस्ता मिल रहा हैं।

साथ ही आप समान व्यापार करने वाली कंपनियों के P/E रेश्यो की भी तुलना कर सकते हैं।

aaj kaunsa share kharide

आमतौर पर अधिकतर नए निवेशकों द्वारा कम P/E Ratio वाले स्टॉक को अंडरवैल्यूड और ज्यादा P/E Ratio वाले स्टॉक को ओवरवैल्यूड समझा जाता है। यह बात आंशिक रूप से सही भी है।

लेकिन प्रत्येक कम P/E Ratio वाला शेयर सस्ता हो, ये जरूरी नहीं होता। P/E Ratio कम होने के सामान्यतः दो कारण हो सकते हैं। पहला या तो शेयर undervalued हैं दूसरा की कंपनी में निवेशकों का खास रुझान नहीं हैं।

इसलिए यदि आप जिस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं और उसका P/E Ratio कम हैं तो उस स्टॉक के P/E  के कम होने का कारण जरूर पता कीजिये।

P/E Ratio को कंपनी के EPS के द्वारा निकाला जाता हैं, जो हिस्टोरिकल डाटा के अलावा कुछ नहीं हैं। इसलिए अगर आप किसी कंपनी के फंडामेंटल को रिसर्च करके भविष्य की अर्निंग को समझने में कामयाब रहते हैं तो आप Stock Picking में महारत हासिल कर सकते हैं।

P/E Ratio की सीमाएं क्या होती हैं?

दोस्तों, P/E Ratio किसी भी कंपनी के शेयर को चुनते समय एक महत्वपूर्ण पैरामीटर अवश्य होता हैं। परन्तु ये रेश्यो सभी जगह काम नहीं आता। इस रेश्यो की कुछ  सीमाएं भी हैं जिनका आपको ध्यान रखना आवश्यक हैं –

  • यदि कोई कंपनी अभी मार्केट में नई हैं और हाल में प्रॉफिट नहीं कमा पा रही हैं या कंपनी नुकसान में हैं तो इन कंपनियों को P/E Ratio से वैल्यू नहीं किया जा सकता हैं।
  • जिन कंपनियों की अर्निंग्स बहुत ज्यादा वोलेटाइल रहती हैं, वहां पर भी P/E Ratio कुछ खास मायने नहीं रखता हैं।

[8] कंपनी के EPS देखे

EPS का अर्थ होता हैं Earning Per Share.

दोस्तों, EPS का मतलब होता है कि कंपनी के नेट प्रॉफिट में से कंपनी के प्रत्येक शेयर को कितना हिस्सा मिलेगा। EPS का सीधा संबंध कंपनी के प्रॉफिट से होता है। यदि कंपनी का EPS अच्छा है तो इसका मतलब है कि कंपनी अच्छा प्रॉफिट कमा रही है।

इसलिए आप EPS को वार्षिक या मासिक आधार पर जरूर देखे। ये सब जानकारी आप कंपनी के फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स में देख सकते हैं।

चलिए EPS को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं –

उदाहरण
मान लीजिये एक कंपनी हैं XYZ Ltd. इस कंपनी के बाजार में कुल 100 शेयर्स हैं, उसमे से 1 शेयर आपके पास हैं। यदि ये कंपनी साल भर के ₹1,000 कमाती हैं तो उस कंपनी का EPS यानि की Earning Per Share होगा = ₹1000÷100 share = ₹10 per share का होगा। इस प्रकार ये कंपनी एक शेयर के पीछे ₹10 कमा रही हैं।  
  • यदि कंपनी का EPS साल दर साल बढ़ रहा हैं तो ये बढ़िया माना जाता हैं।
  • नेगेटिव EPS वाली कंपनियां अच्छी नहीं मानी जाती।

[9] कंपनी के मैनजमेंट की जानकारी प्राप्त करें

किसी भी कंपनी का मैनेजमेंट उस कंपनी की आत्मा माना जाता है। एक बढ़िया मैनेजमेंट उस कंपनी के भविष्य को ओर अधिक उज्जवल बना सकता है जबकि असक्षम मैनेजमेंट अच्छी कंपनी को भी नीचे की ओर ले जा सकता है।

इसलिए अगर आप एक अच्छा शेयर खरीदना चाहते हैं तो कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में सही जानकारी जरूर हासिल करें।

निम्न पॉइंट्स की मदद से आप कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में जान सकते हैं –

  • आप मैनेजमेंट पर्सन की योग्यताएं, पूर्व अनुभव और Tenure की जानकारी प्राप्त करें।
  • ये जानकारी प्राप्त करने के लिए आप कंपनी की एनुअल रिपोर्ट्स पढ़ सकते हैं।
  • आप कंपनी की वेबसाइट से विजन, मिशन और वैल्यू स्टेटमेंट चेक करें। इससे आप कंपनी के उद्देश्य और लॉन्ग टर्म विजन के बारे में जान सकते हैं।
  • साथ ही मैनेजमेंट इंटरव्यू देखें और जानने का प्रयास करें की क्या मैनेजमेंट जो कहता हैं वो करता हैं या नहीं।  
  • कंपनी के Share Buyback के बारे में जानकारी प्राप्त करें। अगर प्रमोटर स्वयं की कंपनी के शेयर पब्लिक से वापस खरीद रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें कंपनी के बिज़नेस मॉडल में विश्वास है और भविष्य में कंपनी के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद हैं।
  • अगर लगातार प्रमोटर होल्डिंग गिर रही हैं तो भी ये माना जाता हैं की कंपनी के प्रमोटर्स का कंपनी में विश्वास कम हो रहा हैं।   ​

[10] कंपनी के शेयर होल्डिंग पैटर्न की जानकारी प्राप्त करें

किस कंपनी के शेयर खरीदे इस सवाल एक एक ओर बड़ा उत्तर हैं कंपनी के शेयर होल्डिंग पैटर्न की जानकारी।

किसी कंपनी का शेयर होल्डिंग पेटर्न ये बताता है कि कंपनी के शेयर किन-किन व्यक्तियों के पास हैं? शेयर होल्डिंग पैटर्न में  आपको ये देखना है कि शेयर्स का कितना हिस्सा प्रमोटर्स के पास हैं। प्रमोटर्स के पास जितना अधिक Shares का हिस्सा होगा, उतना ही अच्छा माना जाता है।

यदि कंपनी के प्रमोटर्स के पास ज्यादा शेयर होल्डिंग होगी तो यह माना जाता है कि उन्हें कंपनी के बिज़नेस मॉडल पर भरोसा है। आदर्श रूप से देखा जाये तो प्रमोटर्स के पास कम से कम 50% Shares तो होने ही चाहिए। अगर ये ज्यादा हो तो ओर भी बढ़िया माना जाता है।

यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य हैं की Promoters Holding निजी बैंको (Pvt. Banks) पर लागू नहीं होती। साथ ही ऐसी कंपनियां जो बिग स्टेक होल्डर्स के द्वारा चलाई जाती हैं वहां भी शेयर होल्डिंग पैटर्न इतना महत्व नहीं रखता। जैसे की CDSL, IEX, ITC.

साथ ही Pledge शेयर या गिरवी शेयर की स्थिति जरूर चेक करे। देखे की कहीं कंपनी के शेयर Pledge तो नहीं। अगर किसी कंपनी के शेयर Pledge पड़े हो तो ये कंपनी के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

प्रमोटर्स के अतिरिक्त आपको FII और DII की हिस्सेदारी भी जरूर देखनी चाहिए। FII और DII की हिस्सेदारी जितनी अधिक होती हैं उतना बढ़िया माना जाता हैं।

ये भी पढ़े :

[11] डिविडेंड का ट्रेंड

अकेले डिविडेंड को देखकर किसी कंपनी में निवेश करना समझदारी नहीं होगी। लेकिन अगर आप इसे अन्य पैरामीटर्स के साथ प्रयोग करेंगे तो ये आपको मदद करेगा की आपको किस कंपनी के शेयर खरीदने चाहिए।

जिन कंपनियों की वित्तीय हालत अच्छी होती है और अच्छा लाभ कमाती हैं, वह कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को डिविडेंड का भुगतान करती है। शेयर की प्राइस में इजाफे के साथ-साथ नियमित आय के रूप में डिविडेंड को भी महत्व दिया जा सकता है।

इसलिए पिछले 3 से 5 सालों देखें की डिविडेंड क्या हैं, क्या कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को नियमित रूप से डिविडेंड का भुगतान कर रही है। साथ ही Dividend का ट्रेंड भी देखे, क्या समय के अनुसार कंपनी ने अपने शेयर होल्डर्स को ज्यादा डिविडेंड का भुगतान किया हैं।

हालाँकि हाई डिविडेंड्स के लिए PSU स्टॉक्स में निवेश किया जा सकता हैं लेकिन इनमें प्राइस ग्रोथ बहुत कम होती हैं।

[11] ऐसी कंपनियों के शेयर कभी ना ख़रीदे

(i) High Debt Companies: ऐसी कंपनियां जिनमें बहुत ही ज्यादा कर्जा है उनमें आपको निवेश नहीं करना चाहिए। ज्यादा कर्जे वाली कंपनी को निकट भविष्य में बहुत ही ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हाई डेब्ट्स वाली कंपनियों का अधिकांश पैसा ब्याज चुकाने में ही चला जाता हैं।

(ii) High Promoter Pledging companies: ऐसी कंपनी जिनके प्रमोटर्स ने अपने शेयर ऋण लेने के लिए गिरवी रखे हुए हैं और साथ ही प्लेज्ड शेयर्स का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है तो आपको ऐसे स्टॉक में निवेश नहीं करना चाहिए।

यदि कंपनी के प्रमोटर्स ने शेयर्स गिरवी रख कर अपना आख़िरी दांव चल दिया हैं तो उस बिज़नेस का भविष्य संकट में हैं।

(iii) 52 Low companies: 52 वीक लॉ की तुलना में 52 वीक हाई वाले शेयर्स में निवेश बढ़िया माना जाता है। यदि आप कोई बहुत ही खराब चीज को बहुत ही सस्ते दाम में खरीद भी लेते हैं तो भी वह आपको कुछ फायदा नहीं देने वाली। इसीलिए आपको ऐसी कंपनियों में निवेश करने से बचना चाहिए।

किसी शेयर में करेक्शन आना आम बात होती हैं, परन्तु शेयर का लगातार नीचे गिरना ख़तरे की घंटी मानी जाती हैं।

(iv) Loss Making company: यदि आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर रहे हैं तो आपको ऐसी कंपनियों से दूर रहना चाहिए जो की लगातार नुकसान बना रही हैं।

(v) Declining Sales: जिस कंपनी की सेल्स लगातार कम हो रही हैं। उसमें भी निवेश करना कोई विशेष समझदारी नहीं हैं।

किस कंपनी के शेयर खरीदे – निष्कर्ष

दोस्तों, यदि आप शेयर मार्केट में सही तरीके से की गई रिसर्च और एनालिसिस के आधार पर शेयर चुनेंगे तो आपको नुकसान होने की संभावनाएं बहुत ही कम होगी।

अगर आप ऊपर दी गई स्टेप्स के आधार पर शेयर खरीदेंगे तो आप एक अच्छा शेयर ख़रीद सकते हैं। हालाँकि हो सकता है की शुरुवात में आपको ये जानकारी जुटाने में परेशानी का सामना करना पड़े परन्तु जब आप इस काम को लगातार करेंगे तो आपको ये प्रोसेस बहुत ही आसान लगने लगेगी। साथ में आपको स्टॉक एनालिसिस में मज़ा में भी आने लगेगा।

दोस्तों, शेयर बाजार में पैसे कमाने का एक गुरु मंत्र हैं की क्वालिटी शेयर्स को हमेशा सस्ते दाम पर ख़रीदे और लम्बे समय तक निवेशित रहने का प्रयास करें।

लेकिन स्टॉक मार्केट में अधिकतर निवेशक मात्र धैर्य ना रख पाने के कारण ही स्टॉक मार्केट में पैसा गंवाते हैं। वे अपने पोर्टफोलियो में थोड़ा सा नुकसान देखकर ही बहुत जल्दी पैनिक कर जाते हैं और नुकसान में ही अपना निवेश बेच देते हैं।

दोस्तों, आज आपने इस आर्टिकल में जाना की किस कंपनी के शेयर खरीदे। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो इस आर्टिकल को अपने मित्रों के साथ जरूर शेयर करे।

FAQ:

  1. किस कंपनी के शेयर खरीदे 2022 में?

    आप फ़ण्डामेंटली क्वालिटी स्टॉक खरीद कर उनमें निवेश कर सकते हैं। HUL, ITC, HDFC Bank, CDSL, HDFC AMC, Asian Paints, Pidilite कुछ मजबूत कंपनियों के उदाहरण हैं।

  2. कम कीमत वाले मजबूत कंपनियों के शेयर 2022 के लिए कौनसे हैं?

    IEX, ITC, टाटा पावर, IRFC, रेलटेल, Trident कुछ कम कीमत वाले मजबूत कंपनियों के शेयर के उदाहरण हैं।

  3. शेयर मार्केट में शेयर कैसे खरीदे?

    आप किसी भी स्टॉक ब्रोकर के पास अपना डीमैट अकाउंट खुलवाकर किसी भी कंपनी के शेयर खरीद और बेच सकते हैं।

Leave a Reply

Punji Guide